इंसानियत

दियो को जलाकर भी देखना कहीं अंधेरा न रह जाएं।
झोंका नफरतो की आँधियों का रोशन चिरागो को ना बुझा जाएं ।
रोक दो उन आँधियों को जो नफ़रत फैलाती है ।
इंसान को इंसान नहीं, हिन्दू मुस्लिम बनाती है ।
खुशियों से भरे इस मीठे पर्व में भी जात पात का चुपके से ज़हर घोल जाती है।
आज मिलके एक प्रण करो,
 धर्म किसी का कुछ भी हो 
साथ सिर्फ इंसानियत का दो
साथ सिर्फ इंसानियत का दो।

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